26 June, 2015

About Purushottam Maas (Adhik Maas)


जिस चंद्रमास में सूर्य का स्पष्ट गति प्रमाणानुसार संक्रमण न हो वह अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) कहलाता है। अधिक मास में उपवास, दान, धर्म, पूजा-पाठ, यज्ञ-हवन और ध्यान करने से मनुष्य के पाप कर्मों का क्षय होकर उन्हें कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है। पुरुषोत्तम मास में भगवान श्रीकृष्‍ण, श्रीमद्‍भगवतगीता और भगवान विष्‍णु की उपासना की जा‍ती है। पुरुषोत्तम मास में किया गया दान सौ गुना फल देता है। इस माह धार्मिक तीर्थस्थलों पर जाकर स्नान करने से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है।

इनमें खास तौर पर सभी प्रकार के मांगलिक कार्य वर्जित माने गए है जैसे विवाह, मुंडन, गृह आरंभ, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत या उपनयन संस्कार, देवी-देवता की प्राण-प्रतिष्ठा, अष्टाकादि श्राद्ध, कुआं, बोरिंग, तालाब का खनन आदि का त्याग करना चाहिए। लेकिन धार्मिक कर्म, व्रत, दान, जप के लिए यह माह पुण्य फलदायी माना गया है। पुरुषोत्तम मास की शुक्ल व कृष्ण पक्ष की एकादशी महत्वपूर्ण होती है जो इष्ट फलदायिनी, वैभव व कीर्ति में वृद्धि करती है। पुरुषोत्तम मास में एकादशीके दिन उपवास और भगवान विष्णुकी उपासना (विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र) करने से मनोइच्छा पूर्ण होती है।

।। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।।

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