04 June, 2010

Shivshankar Vyas - Biography

मेरे नानाजी शिवशंकर व्यासका यहाँ संक्षिप्त परिचय दे रहा हु वड़ोदरा में उनको आना हुआ देश की आज़ादी हुई उसके करीब से। राज ज्योतिष थे उत्तर गुजरात के। अब यहाँ पंडितो में उन्होंने संस्कृत विद्वत सभा में कार्यमें रत हुए । साथ साथ ज्योतिष की सेवा रही । उनके साथ महाशंकरभाई हरिशंकरजी उनके भाई परमानन्द भवानी शंकर सब ने मिलके शुरू किया था व्यास एंड कंपनी नामका व्यापर जिसमे दवाई यो एवं कागजकी चीजों का व्यापर भी था। किन्तु यह थोड़े साल चला ! अध्यात्मिक कार्य तो था ही।

बोलुन्द्रा में किये हुए अतिरुद्र में जो पूजा किया हुआ शिवलिंग था वह लेके आये थे। शरु में भुतदी जापा (वड़ोदरा) के पास देव ज्योतिशालय था । फिर वहा से शामल बेचार की पोल में आये । उनका नाम सुनके उनके वहा राजकपूर और नर्गिस भी ज्योतिष दिखाने आये थे। यही सम्बन्ध से वो चेम्बूर भी पृथ्वीराज के बुलवाने पर गए थे। और उनका फोरकास्टिंग सही हुआ था । इसी बातो से उनकी विशिष्टता और बढ़ी थी और भ्रुगुसम्हिता का आधार ले कर पुर जिंदगी का फल लिखने की उनकी पद्धति ने बड़ा नाम बनाया था । करीबी १९६५ देव ज्योतिशालय को लेके ए थे बारानपूरा में ! फिर वहा से हरनी रोड पर !

यही उनकी यात्रा ज्योतिष कार्यालय की रही ! यही काम उनके पुत्र राजेन्द्रप्रसाद सम्हाल रहे है। उनके पुत्र किरीटभाइ भी कर्मकांड एवं ज्योतिष के काम में है । उनके दोहित्र धर्मेशकुमार (हिमतनगर) भी कर्मकांड एवं ज्योतिष के काम में है उनकी रत्ना परीक्षा के गुण ने पुत्र राकेश को जेमोलोजी में खीचा है इस तरह यह सेवा जारी रही है ।

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