03 July, 2009

समलैंगिक सम्बन्ध को कानूनी मान्यता !!

समलैंगिक संबंधों की वैधता के लिए २ जुलाई दिन ऐतिहासिक माना जाएगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि आपसी सहमति से वयस्क समलैंगिक संबंध स्थापित कर सकते है और इसे अपराध नहीं माना जा सकता। दिल्ली हाईकोर्ट ने समलैंगिक संबंधों को वैध ठहराया है

‘हे भगवान! यह देश कहाँ जा रहा है?’’
जगद्गुरू कहलाने वाला भारत आज किस संस्कृति की ओर अग्रसर हो रहा है ?

दुनियाभर में भारतीय पारिवारिक तंत्र प्रणालीको सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। कानून या अदालत की नजर में समलैंगिकता जायज है। लेकिन हिंदू धर्मं और भारतीय पारिवारिक तंत्र प्रणालीकी नजर में समलैंगिकता कितना जायज है ?

क्या कोई भी कानूनी विशेषज्ञ, न्यायविद् और राजनीतिक अपने बेटे या बेटी के समलैंगिक संबंधों पर सहमत होगा ? हमारे माता-पिता समलैंगिक होते तो हम पैदा ही नहीं होते और यदि हम समलैंगिक होंगे तो हमारे बच्चे ही पैदा नहीं होंगे।

क्या ये मान लिया जाए कि अदालत के इस फैसले ने विकृति की चरम अवस्था तक का रास्ता तैयार कर दिया हे ? कृपया अपनी राय Comment Box में लिखे।

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