कल मैंने एक ऐसे सिंहको देखा जो सारे भारत में हिन्दुओ को जगाने निकल पड़ा हे. इस सिंह का नाम हे - महेश गिरिजी.
पिछले कई दिन से यहाँ हिम्मतनगर में मंत्र नाद के बारे में सुन रहा था. ये अभियान आर्ट ऑफ़ लिविंग द्वारा महेश गिरिजी चला रहे हे. जब पहेली बार इस के बारे में सुना तो लगा की ये भी कोई राजकीय प्रचार अभियान होगा. लेकिन जब मेने इस कार्यक्रम को देखा तो पाया की ये कोई राजकीय प्रचार नहीं लेकिन एक सिंह की गर्जना हे.
कल हिम्मतनगर में कोलेज ग्राउंड में ये मंत्र नाद का समारोह था. ऐसा लग रहा था की जैसे समस्त हिन्दू एक ही जगह इकठ्ठा हो गए हो. समारोह का आयोजन बहुत ही प्रभावशाली था. शाम ७ बजे गणेश वंदना से समारोह शुरू हुआ. ज़ब महेश गिरिजी स्टेज पर उपस्थित हुए तब कृष्णका बहुत ही मन मोहक भजन चल रहा था, एसा लाग रहा था की जैसे स्वयं कृष्ण ही स्टेज पे आ गए हो. संगीत और भक्ति का समन्वय देखने को मिला.
उसके बाद महेश गिरिजी ने बड़ी नम्रता से अपना प्रवचन शुरू किया. उनके प्रवचन के बारे में क्या लिखू ! वो जब प्रवचन कर रहे थे तो लगता था की जैसे कोई सिंह गर्जना कर रहा हो. उनके प्रवचन में सिर्फ एक ही बात बार बार आ रही थी - भारत में जो भी कुछ परिवर्तन करना हे वो हमको ही करना हे. उनके प्रवचन में कोई भी राजकीय नेता या पक्ष के बारे में प्रचार नहीं था. वो सिर्फ हिन्दूओ के बारे में बोल रहे थे. अगर हम लोगो को चेन से सोना हे तो सब से पहले संगठित होना पड़ेगा. हमें अपनी जाती और गोत्रको भूल जाना होगा और सिर्फ हिन्दू होनी की पहेचान बनानी होगी.
अंत में समारोह में उपस्थित सभी लोगो ने मोमबत्ती जलाई और महेश गिरिजी ने सभी हिन्दूओ को संगठित होने का संकल्प दिलवाया. महत्वपूर्ण बात ये हे की महेश गिरिजी श्री श्री रविशंकर के परम निकट रह चुके हे. उनकी वाणी में राजकारण नहीं था, धर्मं को बचाने के लिए संगठित होने की गर्जना थी. जो लोग एसा मानते हे की धर्मं सिर्फ भजन, सत्संग ही कर सकता हे बाकि कुछ नहीं - उनको में कहुगा की एक बार महेश गिरिजी को जरूर सुने.
इस अभियान को मंत्र नाद नाम दिया हे - जो बिलकुल सही हे. अगर आप को भी इस मंत्र नाद में सामिल होने का अवसर मिला हो तो आप की प्रतिक्रिया Comment में लिख सकते हे.
Apr 24, 2009
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