Apr 3, 2009

गुरु-राहु की युति : जारी रहेगी मंदी

आज हम फख्र से कह रहे है कि भारत पर मंदी का असर नहीं होगा। लेकिन ये हकीकत नहीं है। हमारे देश के प्रधानमंत्री ने वित्त मंत्री भले ही बदल दिया हो, लेकिन भारत की स्थिति सर्विस के क्षेत्र में ठीक नहीं है।

अभी हाल ही में एक वर्ष तक के लिए आईटी के क्षेत्र में प्लेसमेंट के लिए कॉलेजों को मना कर दिया है। आज कोई भी पार्टी इस और ध्यान नहीं दे रही बस उन्हें अपने सत्ता सुख से मतलब है। आखिर जो विद्यार्थी भारी कर्ज लेकर अपनी पढ़ाई कर रहे है वे कहाँ जाएँगे। आज हर संस्थान कर्मचारियों को वैश्विक मंदी का वास्ता देकर निकाले जा रहे है। जिन्हे प्लेसमेंट मिला था उन्हें भी मना कर दिया गया और सरकार का इस और ध्यान नहीं है। आखिर ऐसा क्यों हो रहा हैं ?

जब से गुरु-राहु का संयोग बना तब से कहीं ना कहीं गड़बड़ घोटाला चल रहा है। कई हजारों करोड़ रुपए जनता के शेयर बाजार लिल गया। इस संयोग से कई कम्पनियाँ झूठी हो सकती हैं। राहु-गुरु मिलकर चाण्डाल योग बनाने के कारण सज्जन पुरुष दु:खी व झूठे लोग मालामाल होते हैं। ऐसा शास्त्रों में भी बताया गया है।

राहु 3 नवम्बर से मकर राशि छोड़ कर धनु राशि में जाएगा। यह भी उसकी नीच राशि है लेकिन गुरु का साथ छोड़ने से अशुभता में कुछ कमी आ सकती है, वैसे गुरु की राशि में होने से विशेष अन्तर वाली बात नहीं रहेगी। राहु की स्थिति जब नीच की हो तब भी जिन जातकों की पत्रिका में राहु नीच का होगा उन्हें परेशानी में डालेगा।

ऐसी स्थिति वाले जातकों को महामृत्युन्जय मन्त्र का जाप अवश्य करना चाहिए। ताकि अशुभ प्रभाव से बचा जा सकें। जिनकी पत्रिका में गुरु-राहु साथ होता है उनका दिमाग अक्सर गलत रास्ते पर चलता है, या उनके दिमाग में कुछ न कुछ फितरत चलती रहती है। ऐसे जातकों को राहु की शान्ति अवश्य करना चाहिए। वैसे देखा जाए तो राहु आकाश मण्डल में दिखाई देने वाला ग्रह नहीं है।यह सिर्फ छाया ग्रह हैं। जिस ग्रह के साथ रहता है उसके प्रभाव को नष्ट कर देता है।

यह वृषभ में उच्च का, मिथुन में अपनी राशि का माना जाता है। वैसे मिथुन में उच्च का भी माना जाता है। बस इन्हीं राशियों में अपना शुभ प्रभाव देता हैं। शनि के साथ हो तो करेला नीम चढ़ा वाली बात रखता है।

(Source: webdunia.com)

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